जब दो जातियों या अधिक जातियों के सदस्यों में झगडे की आशंका हो जाती, तब यह मामला किसी एक जाति के न्यायालय के लिये उचित नहीं होता था। और इसे गाँव के मुखिया के पास भेज दिया जाता था।
मुखिया सर्वोच्च अधिकार प्राप्त होता था।
उनको फैसला करने का अधिकार प्राप्त था और वह फैसला लाख असंतोष के बावजूद भी मान्य होता था।
मुखिया की नियुक्ति का परम्परागत नियम था। वैसे जनता द्वारा चुने जाने का।
II.
ऐसे सामाजिक बंधनों से मुक्त ऐसे लोग जिन्हें जो मन आया वह किया, जहाँ मन आया वहाँ गए, जिसके खिलाफ जी चाहा उसके विरुद्ध शिकायत की। पंचायत की न्याय परिषद के समक्ष एक समस्या (93) हो जाती थी कि फैसला किस तरह कार्यान्वित होगा।
पंचायत परिषद के मुखिया या अन्य पंच अपने कुछ लड़के को भी उन्हें डराने-धमकाने भेज देते। कभी-कभी लोग उनकी बात मान लेते थे।
जिस डरकर लोग उनकी बात मान लेते थे।
प्रत्येक जाति में अलग अलग न्याय व्यवस्था थी।
प्रत्येक जाति में एक न्याय परिषद होती थी।
Each caste had a separate justice system. Each caste had a justice council.
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