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आलोच्य अध्ययन के अधिगम के मूलाधार

Fundamental basis for the study under consideration

(Rationale of approach to be adopted for the study of the problem)

यह अभी तक निश्चित नही किया जा सका

कि हिन्दी भाषा में अभीतक कोई वैज्ञानिक ग्रन्थ नहीं है

जो इस विषय के अनुरूप हो अर्थात् पारिभाषिक शब्दों

पारिभाषिक शब्दों का प्रयोग हो। माना जाता है कि अभी तक सर्वथा ऐसे ग्रन्थों का अभाव है। हिंदी भाषा में

तक यह कह सकते हैं कि जैसे तत्व पारिभाषिक ग्रन्थों का अभाव

भी निष्प की भाव से देखने पर यदि वह मान लिया जाए कि

पारिभाषिक शब्दों के क्रमिक विकास के साथ यदि उन्हें प्रयुक्त

किया जाए तो निश्चित ही जहाँ एक ओर भाषा की दृष्टि से

हिन्दी भाषा समृद्ध होगी, वहीं विषय की दृष्टि से मौलिक एवं

सर्वथा तुलनात्मक आँकड़े भी हमारे सामने आएंगे। अतः हमारा

प्रमुख लक्ष्य यह है कि हम हिंदी चिन्तन के लिए विशाल

भारतीय सभ्यता-संस्कृति का एवं विश्व की अन्य सभ्यताओं-

संस्कृतियों के साथ सम्बन्धों का इतिहास खोजें। यह काम

कठिन है क्योंकि भाषिकी की दृष्टि से भी शब्दों का

जो इतिहास है वह हजारों वर्षों की लम्बी यात्रा करते हुए

विभिन्न परिवेशों में विविध अर्थों में प्रयोग होता रहा है।

हम यह कहने में संकोच नहीं करते कि वास्तव में ये शब्द

विभिन्न संस्कृतियों के विभिन्न चरणों के विकास की वह

निरन्तर रचना करते रहे हैं जो केवल किसी जाति या

मानव जाति का मामूली इतिहास नहीं है। वृहत्तर अर्थ में

शब्दों के माध्यम से हमलोग उसी इतिहास की खोज की

ओर अग्रसर होना चाहते हैं।
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